हापुड़ में पत्रकार की हत्या से पत्रकार जगत में आक्रोश, जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने उठाई सुरक्षा की मांग
इनसाइड कंट्री न्यूज़ हिंदी :सौरभ निगम ||पत्रकारों पर बढ़ते हमलों पर जताई चिंता, अध्यक्ष विवेक प्रताप सिंह ने एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की
लखनऊ, 19 अक्टूबर। हापुड़ में पत्रकार की हत्या की घटना के बाद पत्रकार समुदाय में रोष व्याप्त है। पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों ने उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी विषय पर सोमवार को जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एसोसिएशन के कार्यालय में संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में घटना पर दुख जताते हुए पत्रकारों की सुरक्षा और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में संगठन के अध्यक्ष विवेक प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष रवि जायसवाल, कोषाध्यक्ष नरसिंह नारायण पांडे सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने हापुड़ में पत्रकार की हत्या पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारों पर हो रहे हमले पूरे पत्रकार समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उनका कहना था कि यदि जनहित की आवाज उठाने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
इस अवसर पर अध्यक्ष विवेक प्रताप सिंह ने पत्रकारों से अपने अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज तक सच्चाई पहुंचाने और जनसमस्याओं को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विषम परिस्थितियों में भी पत्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
बैठक के दौरान पत्रकारों पर होने वाले हमलों के मामलों में गंभीरता से कार्रवाई करने और उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया। संगठन के सदस्यों ने कहा कि पत्रकारों को आपसी एकजुटता बनाए रखते हुए किसी भी साथी के साथ होने वाली घटना के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठानी चाहिए।
इस मामले में जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एसोसिएशन के संगठन मंत्री श्री राम लायक यादव ने एसपी हापुड़ के पीआरओ के माध्यम से टेलीफोन पर बातचीत भी की। बातचीत के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि पीड़ित को न्याय मिलेगा और आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।
जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने दोहराया कि पत्रकारों की सुरक्षा, अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुटता बेहद जरूरी है। हापुड़ की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि समाज के सामने सच्चाई रखने वाले पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था कब सुनिश्चित की जाएगी।
